रायपुर. छत्तीसगढ़ में सरकार ने निम्नतर न्यायिक सेवा नियमों में तीन महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है. ये राज्य के न्यायिक अधिकारी बनने की प्रक्रिया में अहम बदलाव लाएंगे. इन संशोधनों के अनुसार, अब विधि स्नातक बनने के साथ-साथ राज्य बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन, समय पर त्याग पत्र देना, और वकीलों की समय-सीमा में वृद्धि अनिवार्य हो गई है.
राज्य बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन जरूरी
पहला प्रमुख बदलाव यह है कि अब विधि स्नातक बनने के बाद राज्य बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा. यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि सिविल जज की परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके. राज्य बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को तीन स्तरों में बांटा गया है, जिसमें 30 वर्ष तक के लिए 16500 रुपये, 40 वर्ष तक के लिए 17500 रुपये, और 45 वर्ष तक के लिए 18500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है.
त्याग पत्र देने की बढ़ी समय-सीमा
दूसरे बदलाव के अनुसार, अब न्यायिक सेवा में शामिल होने से पहले उम्मीदवारों को तीन माह पूर्व सूचना देकर अपना त्याग पत्र देना होगा. पहले यह अवधि चार माह थी, जिसे अब घटाकर तीन माह कर दिया गया है. इस बदलाव से उम्मीदवारों को त्याग पत्र देने और नई भूमिका के लिए तैयारी करने का पर्याप्त समय मिलेगा.
अनुभव व योग्यता की समय-सीमा में बढ़ोतरी
तीसरे बदलाव में अनुभव और योग्यता की समय-सीमा को बढ़ाया गया है. अब न्यायिक सेवा में शामिल होने के लिए आवश्यक अनुभव की अवधि को बढ़ाकर 8 माह कर दिया गया है. इस कदम से न्यायिक सेवा में अधिक अनुभवी और योग्य उम्मीदवारों को मौका मिलेगा.
इन महत्वपूर्ण बदलावों के बाद छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायिक सेवा की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता में वृद्धि की उम्मीद है. राज्य सरकार का यह निर्णय न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाने और न्यायिक सेवा में अधिक कुशल अधिकारियों की भर्ती को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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