छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में जिया गांव के रहने वाले किसान योगेश्वर चौबे के खेत में दुर्लभ वन्य प्राणी कुएं से निकाला गया। वह खेत में स्थित कुएं में गिर जाने की वजह से वहीं फस गया था। जिसे काफी मशक्कत के बाद नोवा नेचर व वन विभाग की संयुक्त टीम ने रेस्क्यू करके बाहर निकाला। इस रेस्क्यू आपरेशन को करने में करीब 4 से 5 घंटों का समय लग गया।
मिली जानकारी के अनुसार,जिया गांव के रहने वाले किसान के खेत में बने कुएं के अंदर किसी वन्य प्राणी के गिरे होने की खबर स्थानीय ग्रामीणों ने दी। उसके बाद मौके पर पहुंचकर देखा तो कुएं के किसी वन्य प्राणी होने का अंदेशा हुआ। जिसके बाद इसकी जानकारी संबंधित वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। फिर विभाग ने इसे गंभीरत से लेकर नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार से चर्चा की, फिर संयुक्त टीम का गठन करके मौके पर रवाना किया गया। मौके पर पहुंचने पर गहरे कुएं में गिरे वन्य प्राणी जिसकी पहचान छोटा भारतीय कस्तूरी बिलाव के रूप में किया गया, जो एक दुर्लभ वन्य प्रजाति है। नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार ने बताया कि कस्तूरी बिलाव कुएं के अंदर से स्वयं से निकल नहीं पा रहा था, उसकी सुरक्षा का ख्याल रखते हुए कुएं में नीचे उतरकर उसे सुरक्षित तरीके से निकाला गया। बाद में उसका स्वस्थ परीक्षण कराया गया, वो पूरी तरह से स्वस्थ था। फिर वनमंडला अधिकारी(डीएफओ) के दिशा निर्देश अनुसार उसे बेमेतरा वन परिक्षेत्र में छोड़ दिया गया है, ताकि वह स्वतंत्र रूप से अपना जीवन यापन कर सकें।
कस्तूरी बिलाव (Civet), या गंधबिलाव के रुप में भी पहचान
एशिया और अफ्रीका के ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (विशेषकर वनों) में मिलने वाला एक छोटा, पतला, बिल्ली के आकार से मिलता जुलता स्तनधारी प्राणी होता है। वाइवेरिडाए कुल की सभी जातियां कस्तूरी बिलाव नाम से नहीं जानी जाती है। कस्तूरी बिलावों में अपनी दुम के नीचे एक गंधग्रंथि से एक विशेष प्रकार की कस्तूरी गंध उत्पन्न करने की क्षमता होती है। यह आसानी से वृक्षों में चढ़ जाते हैं और आमतौर पर रात में ही बाहर निकलते हैं। छोटे भारतीय सिवेट चूहों, पक्षियों, सांपों,फलों, जड़ों और कैरियन को खाते है।
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