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सूरजपुर में हाथी का आतंक: दीवार गिरने से 7 माह की बच्ची की मौत, मां गंभीर

 Newsbaji  |  Jan 03, 2025 02:45 PM  | 
Last Updated : Jan 03, 2025 02:45 PM
सूरजपुर में हाथी के दीवार गिराने से सात माह की बच्ची की मौत हो गई.
सूरजपुर में हाथी के दीवार गिराने से सात माह की बच्ची की मौत हो गई.

सूरजपुर. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रमकोला थाना क्षेत्र के अरचोका गांव में जंगली हाथी के हमले से एक दर्दनाक हादसा हुआ. देर रात एक हाथी ने मिट्टी से बने एक मकान की दीवार गिरा दी, जिससे 7 माह की मासूम बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई और उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई. घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे. इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है.

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. वन विभाग ने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाएगा और हाथियों की निगरानी के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से हाथी आतंक को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे, जिससे हर साल जान-माल की हानि हो रही है.

उत्तरी छत्तीसगढ़ में बढ़ रही है हाथियों की समस्या
छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी जिलों जैसे सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर, रायगढ़ और सरगुजा में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. इन इलाकों में हाथियों के झुंड फसलों को नुकसान पहुंचाने के अलावा कई बार ग्रामीणों के घरों को तोड़ देते हैं और जानलेवा हमले भी करते हैं. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में हाथी हमलों में 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है.

हाथी-मानव संघर्ष के पीछे कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में भोजन और पानी की कमी, वन क्षेत्रों में अतिक्रमण और खनन गतिविधियों के कारण हाथी अब गांवों की ओर आ रहे हैं. पहले वे सिर्फ फसलों को नुकसान पहुंचाते थे, लेकिन अब सीधे घरों और इंसानों पर हमला करने लगे हैं. वन विभाग ने कुछ जगहों पर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गश्ती दल और चेतावनी प्रणाली स्थापित की है, लेकिन यह प्रयास अभी भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं.

सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि सरकार को हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के लिए अधिक ठोस उपाय करने होंगे. विशेषज्ञों का सुझाव है कि हाथियों के लिए संरक्षित गलियारों (elephant corridors) का निर्माण, प्रभावित परिवारों को तुरंत मुआवजा और हाथी ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है. अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो ग्रामीण क्षेत्रों में हाथी हमलों से जान-माल के नुकसान की घटनाएं और बढ़ सकती हैं.

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