रायपुर। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में बस्तर पंडुम कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाने के लिए, यहां की परंपरा, संस्कृति और कला को पूरे विश्व तक पहुंचाने का काम मोदी सरकार कर रही है। अब ‘बस्तर पंडुम’ उत्सव को अगले वर्ष मोदी सरकार 12 श्रेणियों में मनाएगी और देशभर के आदिवासी कलाकार इसमें शामिल होंगे।
महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव ने जनजातियों के जल, जंगल, जमीन और संस्कृति के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने कहा कि यहां एक प्रजावत्सल राजा के रूप में उनकी लोकप्रियता तत्कालीन सरकार को सहन नहीं हुई और साज़िश के तहत उनकी हत्या कर दी गई थी। आज जब पूरा बस्तर लाल आतंक से मुक्त होने की कगार पर है और विकास के रास्ते पर चल चुका है, तब प्रवीर चंद्र जी की आत्मा जहां भी होगी बस्तरवासियों को अपना आशीर्वाद दे रही होगी।
बस्तर पंडुम है क्या
इस कार्यक्रम में बस्तर संभाग की 1885 ग्राम पंचायतों, 12 नगर पंचायतों, 8 नगर परिषदों, एक नगर पालिका और 32 जनपदों के 47 हज़ार कलाकारों ने इस उत्सव में भाग लिया। इस कार्यक्रम के लिए सरकार ने 5 करोड़ रूपए का आवंटन किया था। पंडुम स्थानीय और पारंपरिक कला, संस्कृति, शिल्पकला, तीज-त्यौहार, खानपान, बोली, भाषा, रीति रिवाज़, वेशभूषा, आभूषण, पारंपरिक गीत-संगीत और व्यंजन को मूल रूप में संवर्धित और संरक्षित करने का काम कर रहा है। सात श्रेणियों में मनाए जा रहे बस्तर पंडुम उत्सव को अगले वर्ष 12 श्रेणियों में मनाया जाएगा और देशभर के आदिवासी इसमें शामिल होंगे।
नक्सली हथियार से बस्तर का विकास नहीं रोक सकते- अमित शाह
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वह जमाना गया, जब यहां पर गोलियां चलती थी और बम धमाके होते थे। उन्होंने सभी नक्सलसियों से अपील करते हुए कहा कि वे हथियार डालकर मुख्यधारा में आ जाएं क्योंकि बस्तर विकास चाहता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बस्तर को सब कुछ देना चाहते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब बस्तर में शांति हो। यहां के बच्चे स्कूल जाएं, माताओं के स्वास्थ्य की चिंता हो, आदिवासी और युवा कुपोषण से पीड़ित न हों, बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था हो, हर गांव में दवाखाना हो और तहसील में अस्पताल हो, तभी विकास संभव है। उन्होंने कहा कि यह सब तभी हो सकता है जब बस्तर के लोग तय करें कि वे हर गांव को नक्सलवाद मुक्त बनाएंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार ने घोषणा की है जो गांव सभी नक्सलियों से सरेंडर कराएगा उस गांव को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर एक करोड़ रूपए की विकास राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई किसी को मारना नहीं चाहता, इसीलिए नक्सलियों को हिंसा छोड़कर मेनस्ट्रीम में आना चाहिए और उनका संरक्षण भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार करेगी। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सली हथियार लेकर पूरे बस्तर का विकास नहीं रोक सकते, जो लोग यह समझ गए हैं कि विकास के लिए हाथ में बंदूक नहीं, कंप्यूटर चाहिए, IED और हथगोला नहीं बल्कि कलम चाहिए, उन सबने सरेंडर कर दिया है।
अमित शाह ने कहा नक्सलवाद को समाप्त करने कि दिशा में इस साल अब तक 521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 2024 में कुल 881 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जो नक्सली हथियार छोड़ेंगे वे मुख्यधारा में शामिल होकर आगे बढ़ सकेंगे, लेकिन जो हथियार उठाकर हिंसा के रास्ते पर चलेंगे उनके साथ सुरक्षाबल सख्ती से निपटेंगे। उन्होंने फिर से दोहराया कि मोदी सरकार, मार्च, 2026 तक पूरे देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने के प्रति कटिबद्ध है।
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