छत्तीसगढ़ के लाखों युवा जो पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनने के लिये दिन रात परिश्रम कर रहे हैं, पर 2018 से सरकार की अनदेखी के कारण तनावग्रस्त हैं. कॅरियर, घर परिवार , समाज , जीवन का ऐसे कोई भी आयाम नहीं बचा है, जहां से ये युवा मानसिक छति ना झेल रहे हो. महिलाओं पर परिवार द्वारा शादी का दबाव है, भर्ती का इंतेजार करते-करते अब उम्मीद छोड़ चुके हैं और सब-इंस्पेक्टर बनकर देश सेवा और शशक्त बनने की इच्छाओं का गला भी घोट चुके हैं.
पहले ही 3 साल 5 महीने की देरी और अब दूसरी बार फॉर्म भरवाने के बाद भी 4 महीनों से भर्ती रुकी हुई है. शायद ही इस देश मे कोई ऐसी भर्ती होगी जो इतने लंबे अंतराल से केवल शुरू होने के लिए ही रुकी हुई हो. 655 से 975 पद बढ़े, 1,35,402 आवेदनों में निश्चित पुनः आवेदन से संख्या बढ़ी है और सरकारी खजाने में फॉर्म से धनराशि भी. नए युवाओं को अवसर मिला पर 3 सालों से इंतजार कर रहे युवाओं को धोखा. सरकार की लेटलतीफी से अधिक उम्र के युवाओं को अब अपने से 10 साल छोटे युवाओं से कंपीटिशन करना है, जो शारारिक तैर पर उनसे कई गुना ज्यादा सक्षम हैं. फिर भी वे जी जान से लगे हुए हैं, पर भर्ती का अता-पता नहीं है.
सवाल पूछने पर गृहमंत्री जी तिलमिला जाते हैं और जानकारी देने में खुद को हमारे जितना ही असमर्थ जताते हुए सब कुछ कैबिनेट में तय होगा ऐसा कहते हैं. अधिकारी भी बस 1 महीने में शुरू हो जाएगी कहकर टालमटोल जवाब देते हैं. 3 सालों से ये 1 महीना ना जाने कितने बार निकल गया, लेकिन भर्ती जस की तस.
लंबी भर्ती प्रक्रिया और नजदीक आता 2023 विधानसभा चुनाव
शारारिक नापजोख,दो चरणों में लिखित, फिजिकल, इंटरव्यू तब जा के कहि ट्रेनिंग और पोस्टिंग. अगले माह से भी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाए तब भी 1 साल से ज्यादा का समय लग सकता है. 2018 में जिस प्रकार पूर्व सरकार ने ठीक चुनाव से पहले फॉर्म भरवाकर भर्ती को अधर में लटका दिया था. अब लगता है फिर वही खेल मौजूदा सरकार द्वारा खेला जाएगा. हो भी क्यों ना फॉर्म भरवाकर चुनाव के लिए अच्छी खासी धनराशि इक्कठी जो हो जाती है. पूरी संभावना है कि आधी प्रक्रिया के बाद चुनाव का हवाला देकर फिर भर्ती पर विराम लगा दिया जाएगा.
व्यापम से लेकर CGPSC की तमाम भर्ती परीक्षा लगातार आयोजित हो रही हैं. (CSE, मंडी निरीक्षक, सम्परिक्षक, महिला पर्यवेक्षक, खाद्य निरीक्षक, वन क्षेत्रपाल, क्षेत्ररक्षक, CSEB आदि ) लेकिन इस भर्ती पर से ग्रहण नहीं हट रहा है. व्यापम और CGPSC की परीक्षाएं पिछले 2-3 महीनों में ही नोटिफिकेशन जारी करने से लेकर संपादित करने की प्रक्रिया पूरी हो गयी तथा मंडी निरीक्षक के नतीजे भी व्यापम द्वारा जारी कर दिए गए.
तमाम आंदोलन ज्ञापन और मीडिया कवरेज के बाद भी सरकार हमारी व्यथा को अनदेखा कर रही है. दूसरे राज्यों में भर्ती विधान और अपने राज्यों के युवाओं का बेड़ा गर्ग. मुख्यमंत्री जी से इन 3 सालों में मिलने के लिये एक बार भी अपॉइंटमेंट नहीं दिया गया. नए युवाओं में जुनून जरूर बरकार होगा. हमने भी 3 साल तक बरकरार रखा. पर पुलिस में जाने का जुनून इतना दुखदायी होगा किसी ने ना सोचा था.
केरल में 2018 से 2 सब इंस्पेक्टर बैचों की ज्वाइनिंग हो गयी है. अन्य राज्यों में जैसे उत्तर प्रदेश, असम, बिहार, तेलंगाना में भी कम से कम 1 बैच जोइनिंग ले चुका है पर छत्तीसगढ़ सरकार 3 सालों से SI भर्ती को लेकर बस बातें बना रही है.
ना तो युवा पुलिस में जाने के जुनून को खत्म कर पा रहे हैं ना बरकरार रख पा रहे हैं. अब शायद कोई युवा सीधे तौर पर रुकी भर्ती से तनाव में आकर गलत कदम उठा ले तब जा कर सरकार अपने पर लगे कालिख को साफ करने के लिये भर्ती शुरू कर दे या उस युवा को मानसिक विछिप्त घोषित कर दे.
-सुनील कुमार, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर भर्ती अभ्यर्थी
(Disclaimer: लेखक युवा बेरोजगार हैं, उन्होंने छत्तीसगढ़ की एसआई परीक्षा के लिए आवेदन किया है. वे सोशल मीडिया पर बेबाकी से खुले खत लिखने के लिए भी जानें जाते हैं. यह खत उन्होंने न्यूजबाजी के लिए लिखा है. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह हैं. इसके लिए Newsbaji किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
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